शनिवार, 25 जुलाई 2020

हार में जीत छुपी हे

हार में जीत छुपी हे 


कामयाबी एक खूबसूरत एहसास है हर कोई सफलता चाहता है किसी को भी हार अच्छी नहीं लगती
लेकिन हार के पीछे ही जीत का  रहस्य छुपा  है| हार आपको खुद को सुधारना सिखाती है |असफलता
आपको संघर्ष करना सिखाती है यह आपको हकीकत से  रूबरू कराती है |यह आपको सच्चे दोस्तों
की पहचान करना सिखाती है यह आपके अंदर इससे बेहतर इंसान बनने की क्षमता विकसित करती
  हैं| हार के बाद ही आपको पता चलता है किआप उससे कई गुना बेहतर है और इससे अधिक करने
की क्षमता रखते हैं इसीलिए हार से डरो मत बल्कि एक नए जोश के साथ आगे बढ़े| इससे बेहतर
मौका आपका इंतजार कर रहा हे|

शनिवार, 18 जुलाई 2020

  चक्रासन मेरूदंड के विकारों में लाभकारी


पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोडिये और एडिया नितम्बों के समीप लगाकर दोनो हाथो को उल्टा करके कंधो के पीछे रखे और श्वास अन्दर भरकर कमर और छाती को उपर उठाइये।फिर हाथ व पैरो कोे पास लाने की कोशीश करते हुए शरीर की चक्र जैसी आकृति बनानी है।फिर धीरे धीरे शरीर को ढीला छोडते हुए कमर भूमि पर टिका दें । इस तरह 3से 4 बार करे। यह आसन कमर दर्द,श्वास संबधी रोग,सिर दर्द,सर्वाइकल व स्पोंडोलाईटिस में लाभकारी है व महिलाओं के गर्भाशय व मेरूदंड के विकारों को दूर करता है ।हमारी आंतो को सक्रिय करके हमारी हाथ पैरो की माॅस पेशियो को मजबूत करता है।

   प्रेषकः-
   भुवनेश्वरी मालोत
महिला पंतजलि योग समिति 
  बाॅसवाडा ( राज) 

गुरुवार, 16 जुलाई 2020

योग  भगाए,कोरोना रोग 

आज पूरा विश्व कोरोना संक्रामक वायरल रोग से लड़ रहा है |  इस  दावानल से हमारा जीवन खतरे में आ गया है इसके बचाव हेतु लॉकडाउन मुंह पर मास्क सोशल डिस्टेंसिंग हैंड वाशिंग सैनिटाइजर जेसे बचाव लिए जा रहे हैं |आप घर में  ही केद हैं | ऐसे में योग साधना  कोरोना के बचाव का एक माध्यम  हे यह उत्तम समय हे| जब आपके पास काफी समय है ऐसे में हम शरीर को तंदुरुस्त बनाकर योग शक्ति के माध्यम से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं” योग चितवृत्ति निरोध” योग से हमारी चित्तव्रतियों पर लगाम लगती है |मन में भोग  प्रवती कम होती है| जीवन में एकात्मता और एकरूपता आती है| महर्षि पतंजलि द्वारा बताए गए अष्टांग सूत्र - यम ,नियम, आसन, प्राणा
याम,  प्रत्याहार, धारणा , ध्यान और समाधि से जीवन में स्वस्थय, समृद्धि व आनंद की प्राप्ति होती है|

     आजकल आप प्रतिदिन सुबह शाम खाली पेट योगाभ्यास कर सकते हैं साथ में धीमी  मंद गति का भजन व संगीत भी चला सकते हैं| विभिन्न आसनों से आप शरीर को लचीला,स्फुर्तिवान  और छरहरा बना सकते हैं| सूर्य नमस्कार एक प्रभावी आसन  है जिससे पूरे शरीर में उर्जा  आ जाती  हे| योगीग जोगिंग से  भी शरीर में गर्मी उत्पन्न हो जाती हैं और शरीर ऊर्जावान बन जाता है|

  आसनों के साथ प्राणायाम भी करना चाहिए | प्राणायाम में श्वास के माध्यम से प्राणों का नियमन है| इस योगाभ्यास से फेफड़ों ,ह्रदय, मस्तिक एवं आंतरिक  अंगों को बल मिलता है| भस्त्रिका, कपालभाति ,अनुलोम विलोम ,बाह  प्राणायाम भ्रामरी, उदगीत,  उज्जाई  प्राणायाम  से शरीर का प्राण तत्व मजबूत होता है|  प्राणायाम एक सुपर ऑक्सीजनेशन प्रक्रिया है|एक चमत्कारिक साधना है जिसके अप्रत्याशित लाभ है| ध्यान योग साधना  की असली मजबूत कड़ी है आप शांत  हवादार कमरे में आसन लगाकर ध्यान कर सकते हैं विभिन्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए  ध्यान में विलीन हो सकते हैं|  आप ध्यान में सुदर्शन  क्रिया, ,सहजयोग,विपासना,सोहम ध्यान,ईशा क्रिया,इत्यादि कर सम्पूर्ण आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति ले सकते हैं|मेरा पूर्ण विश्वास है आज आपका पूरा दिन बहुत अच्छा निकलेगा |
                            योग के अतिरिक्त  इन दिनों प्रशिक्षण द्वारा   षटकर्म  क्रिया भी कर सकते हैं जिसमें जल नेती ,सूत्र नेती, कुंजल और शंख प्रक्षालन प्रमुख है| जो शरीर की आंतरिक शुद्धि करते हैं   जिससे डिटॉक्सिफिकेशन कहते हैं|
            आप इन दिनों कोरोना वायरस से बचने के लिए दिव्य औषधि के रूप में गिलोय, तुलसी, काली मिर्च, अदरक, हल्दी, नींबू, मुलहठी का  काढा  पी सकते हैं| हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र जी मोदी द्वारा बताएं गोल्डन मिल्क (हल्दी मिश्रित  दूध )का सेवन कर सकते हैं जिससे शरीर की (इम्यूनिटी) रोग प्रतिरोधक क्षमता   बढ़ेगी|
                  आइए इस समय  समय का सदुपयोग कर योग के माध्यम से कोरोना से लड़ने की दिव्य जीवन शक्ति को बढ़ाएं तथा जीवन को सुखद और आनंदमय बनाएं| 
                               आइए हम इस समय “करें योग, रहे निरोग” के सूत्र को  करें सार्थक करें|
                                                                                                 




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                                                                                               भुवनेश्वरी मालोत

                                                                                              बांसवाडा

मंगलवार, 14 जुलाई 2020

वीरा

वीरा     ( WEERA)
W   -  WOMEN                  महिला
E    -    EDUCATION          शिक्षा
E     -   EMPOWERMENT  सशक्तिकरण
R     -    RURAL                   ग्रामीण
A      -   AREA                      क्षेत्र

WEERA ( वीरा ) शब्द सिर्फ शब्द नहीं है वरन  एक आशा है, एक विश्वास है, यह एक जीवंत लड़ाई है उन महिलाओं के लिए जिन्हें आर्थिक सामाजिक  बौद्धिक व अन्य सभी स्थानों   पर एक संबल की  आवश्यकता है जिससे वे अपने जीवन की समस्याओं के चक्रव्यूह से बाहर आकर अपनी पहचान बना सकें अपने आप को सशक्त कर सके महिला  अबला नहीं   सबला बन सके|

सोमवार, 13 जुलाई 2020

शंख उद्घोष भी प्राणायाम है|

शंख में हमें प्रकृति से मिला एक अनमोल उपहार है यह समुंद्र से प्राप्त होता है  शंख की आकृति व पृथ्वी के  संरचना समान है इसका महत्व प्राचीन काल से धार्मिक कार्यों में पूजा में ज्योतिष में स्वास्थ्य संबंधी  परेशानियों को दूर करने में  वास्तु में होता है इससे सुंदर सुंदर उपयोगी व कलात्मक  चीजें बनाई जाती है |नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार शंख बजाने से खगोलीयऊर्जा का उत्सर्जन होता है जो जीवाणुओं  कानाशकर लोगों में ऊर्जा व शक्ति का संचार करता है शंख  प्रमुखतया  तीन प्रकार के होते हैं वामा वृत्तिदक्षिणावर्ती व् मध्यवर्ती|

धार्मिक कार्यों को करने से पहले शंख ध्वनि उत्पन्न करना हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण विशेषता है कहा जाता है कि इससे वातावरण की अशुद्धियां दूर होती है नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है वातावरण में चेतन्यता आती है और पूजा सार्थक होती है रज तत्व तम तत्व खत्म कर सत तत्व का  प्रवाह होता है विष्णु  पुराण के अनुसार शंख लक्ष्मी का सहोदर होता है समुंद्र मंथन पर 14  रत्ना प्राप्त हुए थे |आठवें स्थान पर शंखमिला था कहा जाता है कि जिस घर में शंख होता है वहा महालक्ष्मी का वास होता है सुबह शाम  शंख की ध्वनि करने से  वास्तु दोष दूर होता है घर में नकारात्मकता दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा का  प्रवाह  होता है| तानसेन ने शंख बजाकर गायन की शक्ति प्राप्त की थीआधुनिक युग में जीवन की आपाधापी व भागदौड़ वाली जिंदगी में मनुष्य कई बीमारियों से ग्रसित हो गया है स्वस्थ होने के लिए उसे डॉक्टरों दवाइयों की शरण में आना पड़ता है यदि व्यक्ति स्वयं स्वस्थय रहना चाहता है तो शंखनाद, शंख ध्वनि करना, शंख बजाना ऐसी क्रियाएं जिससे अनेक प्रकार की  बीमारियों बचा जा सकता है| वैज्ञानिकों के अनुसार शंखनाद मैं प्रदूषण को दूर करने की अद्भुत क्षमता हैशंख की आवाज जहां तक जाती है वहां तक कई रोगों के किठाणु या तो खत्म हो जाते हैं या निष्क्रिय हो जाते हैं| शंख बजाना भी एक प्राणायाम है क्योंकि से बजाने से योग की कई क्रियाएं एक साथ हो जाती है कुंभक रेचक ध्यान  उज्जाई प्राणायाम| फेफड़ों को पूरी तरह से श्वास से भरकर व बिना सांस लिए गर्दन को उपर करके के शंख  बजाना चाहिए|   नेत्र बंद, ध्यानावस्था व ईश्वर भक्ति में निमग्न होकर शंख
बजाने से हमारी सुषुम्ना नाड़ी जागृत होती है हमें ईश्वर शक्ति का अप्रत्यक्ष साक्षात्कार होता है शरीर में शाश्वत ऊर्जा का संचार होता है|


शंख बजाने से कई चमत्कारिक स्वास्थ्य लाभ होते हैं अनेक रोगों से निवृत्ति होती  है|

1. फेफड़ों का  अच्छा व्यायाम है उसे बजाने से हमारे फेफड़े पुष्ट होते हैं अस्थमा दमा और एलर्ज छुटकारा मिलता है | श्वास संबंधी बीमारियों से बच सकते हे

2. शंख ध्वनि हमारे दिमाग व स्नायु तंत्र को सक्रिय करते हैं|

3. मनोरोगी के लिए  शंख बजाना एक चमत्कारिक उपाय है क्योंकि इससे उत्तेजना कम होती है और मन और मस्तिष्क एकदम सहज व  शांत हो जाता है 

4. ह्दय रोगों में लाभकारी हे इससे ह्दय की  मांसपेशियां मजबूत होती है|

5. ब्लड प्रेशर का रामबाण इलाज  है|

6. शंखनाद  से स्मरण शक्ति बढ़ती है|

7. Vocal code सही होती है और thyroid से  छुटकारा मिलता है|

8. बच्चों का तुतलानाना शंख बजाने से दूर हो जाता है |इससे बच्चों को अनेको फायदे   हैं
 
शंख  बजाने से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़तीप्राकृतिक  आभा स्वत दिखाइए देती है|


सावधानियां :-          

गर्भवती  व् स्तनपान कराने वाली माताओं को शंख नहीं बजाना चाहिए शंख बजाने से  नाभि पर प्रेशर  आने से गर्भ गिरने की संभावना रहती है| इससे दूध की मात्रा पर प्रभाव पड़ता हेआइए शंख वादन को दिनचर्या में शामिल कर जीवन को स्वस्थ व स्फुर्तिवान बनाएं
  

भुवनेश्वरी   मालोत

 बांसवाडा(राज.)