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सोमवार, 8 अक्तूबर 2012

झूठी शान शौकत से दूर रहे

मैं अपनी सहेली के वहाॅं उसके पोते की जन्म-दिन पार्टी पर गई थी ।वह बडे उत्साह के साथ अपनी शान-शौकत का बखान कर रही थी और कह रही थी कि मेरा बेटा शासकिय सेवा में होने के कारण उपर की आमदनी अच्छी होती है,इसलिए मेरे बेटे ने बच्चों को सब सुख-सुविधा दे रखी है।मैं यह सोचने पर मजबूर हुई कि अनैतिक तरीके से अर्जित की गई कमाई से क्या बच्चों को अधिक से अधिेक सुविधा उपलब्ध करना अनिवार्य है।


ऐसे बच्चे अपने जीवन की विकट परिस्थितियों का सामना अच्छी तरह से नहीं कर पायगें और अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए भष्ट्र्र्र्र्र तरिको को अपनाने से भी नहीं चुकेगे।हर माता-पिता का कर्तव्य है कि बच्चों को जितनी आवश्यकता है उतनी सुविधा प्रदान कर।ताकि बच्चे हर परिस्थिति में अपने आपको संतुलित रख कर कार्यकर सके ।

श्रीमति भुवनेष्वरी मालोत

महादेव काॅलोनी

बाॅसवाडा