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शनिवार, 17 जून 2017

कोख को क्रब मत बनाओ 

आज गर्भ में पल रही बेटियों की पहचान करके उस कोख को ही उजाड दिया जा रहा है और डाॅंक्टर दौलत का जुगाड बिठा रहे है और इस पाप में हम सभी शामिल हो रहे है।आज संसार के संचार का  आधार बेटिया ही है।इनका जन्म दुर्गा सरस्वती के रूप में हुआ है ।जिन्होने पिछले जन्म में नेक कार्य किये हो वही इस जन्म में बेटियो का उपहार पाते है आज बेटिया हर रिश्ते  डोर है घर और बाहर दोनो जगह अपना राॅल अच्छी तरह निभा रही है जब कभी घर,परिवार और देश  पर संकट के बादल छाते है तो बेटिया माॅ दुर्गा का रूप धारण कर उसका डट कर मुकाबला करती है फिर क्यों रोज-रोज बेटियों को कोख में ही मार दिया जाता है यह हम सब के लिए विचारणीय पहलू है।आप बेटियों को कोख में ही मार कर एक हिंसक अपराधी की श्रेणी में अपना नाम दर्ज न करे ।

बेटी है तो कल है,
बेटी है तो जीवन में मुस्कान है,
बेटी है तो आशाओं का संसार है।

                   भुवनेशवरी  मालोत


                      बाॅसवाडा राज


























































































































































































































































शनिवार, 3 जून 2017

*दैनिक योग का अभ्यास - क्रम*
*प्रारंभ* : तीन बार ओ३म् लंबा उच्चारण करें।
*गायत्री - महामंत्र* : ओ३म् भूर्भुव: स्व:। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।।
*महामृत्युंजय - मंत्र* : ओ३म् त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम। उर्वारुकमिव बंधनामृत्योर्मुक्षिय माऽमृतात्।।
*संकल्प - मंत्र* : ओ३म् सह नवावतु। सह नोै भुनक्तु। सह वीर्य करवावहै।तेजस्विनावधीतमस्तु।मा विद्विषावहै।।
*प्रार्थना - मन्त्र* ओ३म् ॐ असतो मा सद् गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय। ओ३म् शान्ति: शान्ति: शान्ति:।।
*सहज - व्यायाम : यौगिक जौगिंग*
(समय- लगभग 5 मिनट) तीन प्रकार की दौड़, तीन तरह की बैठक, चार साइड में झुकना, दो तरह से उछलना, कुल 12 अभ्यास।
सूर्य - नमस्कार 3 से 5 अभ्यास (समय- 1से 2 मिनट) 12 स्टेप( 1 प्रणाम आसन, 2 ऊर्ध्व हस्तासन, 3 पादहस्तासन, 4 दाएं पैर पर अश्वसंचालन, 5 पर्वतासन, 6 साष्टांग प्रणाम आसन, 7 भुजंगासन, 8 पर्वतासन, 9 बाएं पैर पर अश्वसंचालन, 10 पादहस्तासन, 11 ऊर्ध्वहस्तासनसन, 12 प्रणाम आसन।
*भारतीय - व्यायाम* : मिश्रदण्ड अथवा युवाओं के लिए बारह प्रकार की दण्ड व आठ प्रकार की बैठकों का पूर्ण अभ्यास (समय- लगभग 5 मिनट) 1 साधारण दंड, 2 राममूर्ति दंड, 3 वक्ष विकासक दंड, 4 हनुमान दंड, 5 वृश्चिक दंड भाग 1, 6 वृश्चिक दंड भाग 2, 7 पार्श्व दंड, आठ चक्र दंड, 9 पलट दंड, 10 शेर दंड, 11 सर्पदंड, 12 मिश्र दंड। बैठक 1 अर्ध बैठक, 2 पूर्ण बैठक, तीन राममूर्ति बैठक, चार पहलवानी बैठक भाग 1, 5 पहलवानी बैठक भाग 2, 6 हनुमान बैठक भाग 1, 7 हनुमान बैठक भाग 2, 8 हनुमान बैठक भाग 3।
*मुख्य आसन*:
*बैठ कर करने वाले आसन*: मंडूकासन (भाग 1 व 2) शशकासन, गोमुखासन,वक्रासन।
*पेट के बल लेट कर करने वाले आसन*: मकरासन भुजंगासन (भाग 1 2 व 3) शलभासन ( भाग 1 व 2) *पीठ के बल लेटकर करने वाले आसन*: मर्कटासन (1, 2, 3), पवनमुक्तासन (भाग 1 व 2) अर्ध्द हलासन, पादवृतासन, द्वि- चक्रिकासन (भाग 1 व 2) व *शवासन (योगनिंद्रा)*। समय 10 से 15 मिनट, प्रत्येक आसन की आवर्ती- 3 से 5 अभ्यास)
*सूक्ष्म - व्यायाम* : हाथों, पैरों, कोहनी, कलाई, कंधों के सूक्ष्म व्यायाम व बटरफ्लाई इत्यादि लगभग 12 प्रकार के सूक्ष्म व्यायाम, प्राणायाम के पहले अथवा बीच में भी किए जा सकते हैं। प्रत्येक अभ्यास की आवृत्ति 5 - 10 बार (समय लगभग 5 मिनट)।
*मुख्य प्राणायाम एवं सहयोगी क्रिया*
*1.भस्त्रिका - प्राणायाम*लगभग 5 सेकंड में धीरे-धीरे लंबे गहरा श्वास लेना व छोड़ना कुल समय 3 से 5 मिनट।
*2. कपालभाति - प्राणायाम* : 1 सेकंड में एक बार झटके के साथ श्वास छोड़ना कुल समय 15 मिनिट ।
*3. बाह्य - प्राणायाम* : त्रिबन्ध के साथ श्वास को यथा शक्ति बाहर निकाल कर रोक कर रखना 3 से 5 अभ्यास।
*(अग्निसार - क्रिया)* : मूल- बन्ध के साथ पेट को अंदर की ओर खींचना व ढीला छोडना़ 3 से 5 अभ्यास।
*4. उज्जायी - प्राणायाम* : गले का आकुञचन करते हुए श्वास लेना यथाशक्ति रोकना व बाईं नासिका से छोड़ना 3 से 5 अभ्यास।
*5. अनुलोम - विलोम प्रणायाम*: दाईं नासिका बंद करके बाईं से श्वास लेना व बाईं को बंद करके दाईं से श्वास छोड़ना वापिस दाईं से श्वास भरना वह बाईं से छोड़ने का क्रम करना, एक क्रम का समय 10 से 12 सेकण्ड - अभ्यास समय 15 मिनट।
*6. भ्रामरी प्रणायाम* : आंखों व कानों बंद करके नासिका से भ्रमर की तरह गुंजन करना - 5 से 7 बार।
*7. उद् गीथ - प्राणायाम* दीर्घ स्वर में ओ३म् का उच्चारण 5 से 7 अभ्यास।
*8. प्रणव - प्राणायाम (ध्यान)* : आंखें बंद करके श्वसों पर या चक्रों में ॐ का ध्यान मुद्रा में ध्यान करना - समय कितना उपलब्ध हो।
*देशभक्ति - गीत* : समय लगभग 2-3 मिनट।
स्वाध्याय - चिन्तन : जीवन दर्शन, स्वाभिमान संकल्प - पत्र, ग्राम निर्माण से राष्ट्र निर्माण व संगठन के अन्य प्रसांगिक साहित्य का क्रमबद्ध वाचन समय लगभग 5 मिनट।
*एक्यूप्रेशर* : समय की उपलब्धता अनुसार।
*समापन* : सिंहासन, हास्यासन, 3-3 अभ्यास (समय - 2 मिनट)
*शान्ति - पाठ* : ओ३म् द्यौ: शान्ति रान्तरिक्ष शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरारोषधयःशान्तिः। वनस्पतयः शान्ति र्विश्वे देवाः शान्तिब्रर्ह्म शान्तिः सर्वगृवम शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ।। ओ३म् शान्तिःशान्तिःशान्तिः।।
*विशेष*: योगाभ्यास के क्रम में व्यायाम, सूक्ष्म - व्यायाम व आसनों को पहले या बाद में भी किया जा सकता है। शीतकाल में व्यायाम व आसन पहले तथा प्राणायाम बाद में एवं ग्रीष्म काल में प्रणायाम पहले करवाकर व्यायाम व आसन बाद में कर सकते हैं।                                                                                                                               भुवनेश्वरी मालोत                                                                                                                                        जिला संयोजित                                                                                                                                          महिला पतंजलि योग समिति                                                                                                                             बांसवाडा 

शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

योग से खर्राटो से छुटकारा पाये

                                           

खर्राटे...........सोते समय नाक से तेज आवाज निकलना ही खर्राटे है अर्थात नींद में साॅस मे अवरोध उत्पन्न होना ।खर्राटे आना अच्छे स्वास्थ्य का सूचक नही है खर्राटे जी हां जो आपके स्वास्थ्य के ही नही अपितु आपके आस पास सोने वालो की नींद के भी दुष्मन है खर्राटे जो रात भर आपको सोने नही देते, साथ ही पास में सोये हुए व्यक्ति की नींद में भी खलल डालते है। कही बार खर्राटे आपसी रिष्तेेो के बीच अलगाव का कारण भी बन जाते है। समय रहते इसको रोकना जरूरी है कई लोग सोचते है खर्राटे गहरी नींद के कारण आते है लेकिन ऐसा सोचना गलत है ।ष्ष्वास नली में सिकुडन भी खर्राटे का कारण है। सीधा सोने के कारण,नाक की हड्डी का टेढा होना ,वजन ज्यादा होना आदि कारण भी हो सकते है।यौगिक क्रियाओ व आसनो के द्धारा खर्राटेा से छुटकारा पाया जा सकता है ।योग के माध्यम से ष्वास नली में वसा के जमाव को रोका जासकता है।आप सीधा सोते है तो खर्राटे ज्यादा आते हैं इसके लिए आप हमेषा करवट बदल के सोये ।कपाल भांती व अनुलोम विलोम प्राणायाम 15से 20 मिनट व उज्जायी प्राणायाम 7से 11बार  नियमित करने से सौ प्रतिषत इस समस्या सेे छुटकारा पाया जा सकता है।देषी गाय के दूध से बने घी को दोनो नासिकाओं में डालने से गहरी नींद आयेगी, खर्राटे बंद होगे,साथ ही माइग्रेन की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
शीर्षासन-यह आसन दीवार के सहारे करे ,फायदा होगा।
ंिसंहासन -व्रजासन में बैठकर घुटनों  को थोडा खोलकर दोनो हाथों को जमीन पर रखते हुए हाथों की अंगुलिया पीछे की ओर करके पैरो के बीच हाथों को सीधा रखे ।लंबा गहरा ष्ष्वास भरकर जीभ को बाहर  निकालते हुए ,दोनों आॅखो से भूमध्य में देखते हुए मुॅह को यथासंभव खोल दे।इसके बाद साॅस को बाहर निकालते हुए सिंह की तरह गर्जना करनी है यह आसन 10 से 15 बार करे।यह खर्राटे में सर्वोतम आसन है।
ओ्म का उच्चारण 5से 11 बार करे ।
प्रेशर पांइट-सुखासन में बैठकर बाॅये हाथ से ज्ञान मुद्रा बनाकर दाॅये हाथ की तर्जनी अंगुली से उपर वाले होठों के बीचों बीच नाक के बिल्कुल नीचे वाले पांइट पर एक मिनट का प्रेषर दें। इसे पांच से दस बार अवष्य करे।यह रामबाण का काम करेगी।
                                       भुवनेष्वरी मालोत
                                         जिला प्रभारी
                                       पंतजलि महिला योग समिति
                                        बाॅसवाडा राज.  

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

         कभी राह में पडे पत्थर को हटा कर देखे शायद ेकोई ाेदुर्घटना होने से बच जाये                                        
         समाज  की संवेदनहीनता
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सोमवार, 11 अगस्त 2014

प्रणाम निवेदन या चरण-स्पर्श

प्रणाम निवेदन या चरण-स्पर्श   

                           एक मार्केण्डेय नाम के मुनि थे। उन्हें भगवान शिव की कृपा से एक पुत्र की प्राप्ति हुई, किन्तु वह अल्पायु था। मुनि चिंतित हुए और उन्होंने झट से अपने पुत्र का यज्ञोपवित करा डाला और पुत्र को कहा तुम जिस किसी ब्राहाण,मुनि,पूज्य को देखो उन्हें विनम्र होकर अवश्य प्रणाम करना,आज्ञाकारी पुत्र ने इस अभिवादन व्रत को अपने जीवन में अपना लिया और जो भी मिलता उनके चरणो मे झुक जाते, इस प्रकार ऋषियों ,मुनियोे व पूज्यों से दीर्घायु भवः का आर्शीवाद प्राप्त होता गया और सचमुच वे अश्वथामा,बलि,व्यास ,हनुमान,विभीषण,कृपाचार्य तथा परशुराम इन सातो की तरह वह भी  दीर्घायु व चिंरजीवी होगए।

          महाराज युधिष्ठर ने भी महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह से युद्ध में विजयी होने का आर्शीवाद प्राप्त किया। यह एक संस्कार है,शिष्टाचार का महत्वपूर्ण अंग है,इसमें छोटा बडों को चरण-स्पर्श करता है व समान आयु वर्ग का व्यक्ति नमस्कार करता है।
           अभिवादन शीलस्य नित्यम् वृद्धों वसेविन,
              चत्वारि तस्य वर्धेन्ते आयु विद्या यशो बलम्।
       
        अभिप्राय है कि अभिवादन व चरण-स्पर्श से सभी प्रकार के अभिष्ठ सिद्ध हो सकता है। सुबह उठकर वृद्धजनो व माता-पिता को प्रणाम करने से आयु विद्या यश और बल ये चारो बढते है । कहा गया है कि ‘मातृ देवो भवः पितृ देवो भवः आचार्य देवो भवः।माता-पिता की सेवा पुत्र को सब प्रकार से करनी चाहिये। जो पुत्र माता-पिता की प्रदक्षिणा करता है एवं उनके चरण-स्पर्श करता है,उसने मानो पृथ्वी भर की परिक्रमा कर ली हो,ये तो घर पर उपलब्ध सबसे बडे तीर्थ हैअन्य तीर्थ तो दूर जाने पर प्राप्त होते है।भगवान गणेश ने माता की परिक्रमा करके सब देवो में सर्व प्रथम पूज्य पद प्राप्त किया ।      
             
            यह क्यों व कैसे करना चाहिये इसका भी वैज्ञानिक स्वरूप है। प्रत्येक मानव पिण्ड में विद्युत आकर्षण शक्ति रहती है,ये शक्ति  भी ऋणात्मक व धनात्मक दो प्रकार की होती है इसलिए दाये हाथ से दाये व बाये हाथ से बाये पैर को स्पर्श करने का विधान है इसप्रकार स्पर्श करने से प्रणम्य एवं प्रणामकर्ता दोनो पिण्डो की नेगेटिव एवं पाॅजिटिव दोनो धाराएं समान रूप से मिलती है जैसे विद्युत उत्पादक यंत्र में प्रवाहित संचित विद्युत अपने सम्पर्क में आने वाले दूसरे यंत्र मे ंप्रवाहित हो उठती है वैसे ही प्रणाम करने पर गुरूजन व श्रेष्ठजन के सद्गुण अपने में आजाते है,सिर पर हाथ रखने से शक्ति मिलती है। एक दीपक से दूसरा दीपक जल जाता है और पहले दीपक मे ंकोई न्यूनता नही आती है इसी प्रकार प्रणाम करने से आयु विद्या यश बल सब प्राप्त हो जाता है।आज इसकी उपेक्षा एवं अस्वीकृती के कारण  परिवार समाज और राष्ट् की सारी व्यवस्था बिगड गयी है अभिवादन जीवन के प्रांरभ का मूल संस्कार है अतः इसे प्रयत्न पूर्वक अपने जीवन मे अवश्य उतारना चाहिये।
                 
                     प्रेषकः-
                       श्रीमति भुवनेश्वरी मालोत
                         अस्पताल चैराहा
                         महादेव कॅंालोनी
                         बाॅसवाडा राज