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शनिवार, 7 अप्रैल 2012

जल नेति- नाक की एलर्जी का प्राकृतिक उपाय



ऐलर्जी का अर्थ बाहरी वायुमण्डलिय पदार्थो के विरूद्ध हमारे ष्षरीर की असहनषीलता और अति संवेदनषीलता है,बढते प्रदुषण और बाहरी ऐलर्जन कारको से हमारे ष्षरीर में ऐलर्जी के लक्षण पैदा हो जाते है।जिससे वायुमण्डल मे व्याप्त धूल मिट्टी जानवरों के बाल पेड-पौधे और घास के परागकण हानीकारक गैस ,धुअॅा नाक में जाकर एलर्जी के लक्षण पैदा करते है जिससे ंबार- बार छिके आना, नाक से पानी बहना, नाक मे खुजली और कई बार नाक भी बंद हो जाती है,ऐसे में कई बार मुॅह से साॅस लेना होता है,ऐसी स्थिति में रोगी का हाल बेहाल हो जाता हैं।
कई एन्टीऐलर्जीक गोलिया एवमं  नाक में डालने वाली स्प्रे बाजार मे उपलब्ध है लेकिन इसका तत्कालिक लाभ ही है,बार बार छिको से व अन्य लक्षणो से  बचने के लिए हमारी पुरातन चिकित्सा पद्धति जलनेति बहुत ही प्रभावी है।
नेति का अर्थ है नासिका द्धारा भिन्न-भिन्न द्रव्यों को ग्रहण करना नेति कहलाता है।नेति के कई प्रकार है जल नेति,सूत्र नेति,घृत नेति,तेल नेति और दुग्ध नेति।
जलनैती की अवधारणा हाथी द्धारा अपनी नाक रूपी सूॅड मे पानी खिचनेें और फिर उसे छोडने पर आधारित है ।

 प्रातः काल का समय जल नेति  के लिए उपयुक्त है।इस हेतु टोटीदार लोटे में थोडा गुनगुना पानी भरकर उसमे थोडा सा नमक मिलाकर लोटे की नली को दाई नासिका ंमें लगाकर बाई ंऔर की नासिका को थोडा एक ओर झुकाकर रखे मुख को थोडा खोलकर श्रवास प्रष्वास की प्रकिया मुख से ही करे बायी नासिका से जल प्रवाहित होकर  बाहर निकलता है यही प्रकिया दूसरी नाक से भी करनी चाहिये इस प्रकार पानी के साथ नाक में चिपके ऐलर्जन बहकर बाहर आजाते है।कफरोग न हो तो धीरे-धीरे नमक रहित ठंडे जल से नेति क्रिया करनी चाहिये ।जिनको नजला जुकाम हो उनको नमकयुक्त गर्म जल से यह क्रिया करनी चाहिये नेति क्रिया करने से सर्दी जुकाम ठीक हो जाता है पर कुछ लोगो को नेति करने से सर्दी जुकाम हो जाता है इसके बाद नाक में बचे हुए पानी को कपाल भांति या जोरजोर से छीककर बाहर निकाल लेना चाहिए ताकि अन्दर कोटरो में रूका और भर जाने वाला पानी निकल सके ओर सर्दी जुकाम न हो। नेति क्रिया करने से माइग्रेन व सरदर्द से भी राहत मिलती है।  
                                                  श्रीमति भुवनेष्वरी मालोत
                                                     जिला संयोजिका
                                                     महिला पंतजलि योग समिति
                                                      बाॅसवाडा राज