शनिवार, 31 मई 2014
मंगलवार, 20 मई 2014
गर्भवती महिला योेग में क्या कर सकती है जिससे स्वयं भी स्वस्थ रहे और बच्चा भी स्वस्थ पैदा हो?
गर्भवती महिला योेग में क्या कर सकती है जिससे स्वयं भी स्वस्थ रहे और बच्चा भी स्वस्थ पैदा हो?
एक महिला जब पहली बार गर्भवती होती है तो उसके मन में खुशी के साथ , कई तरह के भय और शकाये भी जन्म लेती है।एक महिला गर्भावस्था में भी योग कर सकती है। योग करने से अनचाहे ंतनाव से छुटकारा
पा सकती हैे
भस्त्रिका प्राणायाम बहुत धीमी गति से करना चाहिये। कपालभांति और बाह्ा प्राणायाम और अग्निसार वर्जित है।यदि थाॅयरायड है तो उज्जायी प्राणायाम करे,थाॅयरायाड का प्रेषर पाॅइट दबाए।अनुलोम-विलोम बहुत ही अच्छा प्राणायाम है।इससे बच्चे को पूर्णरूपेण आॅक्सीजन मिलेगी। आप तनाव से मुक्त रहेगे।

गर्भावस्थाकाल में यदि बुखार रहता है तो गिलोय धनवटी लेना चाहिये। ।गर्भावस्था में रक्तस्त्राव होने पर शीशम के पते का रस ले तुरत फायदा होेेगा।भ्रामरी, उद्गीत ,प्रणव ध्यान व गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए । सुक्ष्म व्यायाम व कुछ सरल आसन भी कर सकती है।इससे प्राकृतिक रूप से प्रसव हो जाता है,सिजेरियन की संभावना नहीं रहती है ।ध्यान से मन का डर व तनाव दुर होता है।शरीर लचीला रहता है जिससे नार्मन व सहज डिलीवरी होती है,आत्मविशवास बढता है व सकारात्मक विचार आते है जिस का बच्चे पर अच्छा असर पडता है न ज्यादा दवाईया लेनी पडती है,न ही कोई परेशानी होती है। इस तरह खुद भी स्वस्थ रहेगी व स्वस्थ बच्चे को जन्म देगी।
जिला-संयोजिका
महिला पंतजलि योग समिति
बाॅसवाडा ( राज)
मंगलवार, 29 अप्रैल 2014
योग से खर्राटो से छुटकारा पाये

खर्राटे...........सोते समय नाक से तेज आवाज निकलना ही खर्राटे है अर्थात नींद में साॅस मे अवरोध उत्पन्न होना ।खर्राटे आना अच्छे स्वास्थ्य का सूचक नही है खर्राटे जी हां जो आपके स्वास्थ्य के ही नही अपितु आपके आस पास सोने वालो की नींद के भी दुष्मन है खर्राटे जो रात भर आपको सोने नही देते, साथ ही पास में सोये हुए व्यक्ति की नींद में भी खलल डालते है। कही बार खर्राटे आपसी रिष्तेेो के बीच अलगाव का कारण भी बन जाते है। समय रहते इसको रोकना जरूरी है कई लोग सोचते है खर्राटे गहरी नींद के कारण आते है लेकिन ऐसा सोचना गलत है ।ष्ष्वास नली में सिकुडन भी खर्राटे का कारण है। सीधा सोने के कारण,नाक की हड्डी का टेढा होना ,वजन ज्यादा होना आदि कारण भी हो सकते है।यौगिक क्रियाओ व आसनो के द्धारा खर्राटेा से छुटकारा पाया जा सकता है ।योग के माध्यम से ष्वास नली में वसा के जमाव को रोका जासकता है।आप सीधा सोते है तो खर्राटे ज्यादा आते हैं इसके लिए आप हमेषा करवट बदल के सोये ।कपाल भांती व अनुलोम विलोम प्राणायाम 15से 20 मिनट व उज्जायी प्राणायाम 7से 11बार नियमित करने से सौ प्रतिषत इस समस्या सेे छुटकारा पाया जा सकता है।देषी गाय के दूध से बने घी को दोनो नासिकाओं में डालने से गहरी नींद आयेगी, खर्राटे बंद होगे,साथ ही माइग्रेन की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
शीर्षासन-यह आसन दीवार के सहारे करे ,फायदा होगा।
ंिसंहासन -व्रजासन में बैठकर घुटनों को थोडा खोलकर दोनो हाथों को जमीन पर रखते हुए हाथों की अंगुलिया पीछे की ओर करके पैरो के बीच हाथों को सीधा रखे ।लंबा गहरा ष्ष्वास भरकर जीभ को बाहर निकालते हुए ,दोनों आॅखो से भूमध्य में देखते हुए मुॅह को यथासंभव खोल दे।इसके बाद साॅस को बाहर निकालते हुए सिंह की तरह गर्जना करनी है यह आसन 10 से 15 बार करे।यह खर्राटे में सर्वोतम आसन है।
ओ्म का उच्चारण 5से 11 बार करे ।
प्रेशर पांइट-सुखासन में बैठकर बाॅये हाथ से ज्ञान मुद्रा बनाकर दाॅये हाथ की तर्जनी अंगुली से उपर वाले होठों के बीचों बीच नाक के बिल्कुल नीचे वाले पांइट पर एक मिनट का प्रेषर दें। इसे पांच से दस बार अवष्य करे।यह रामबाण का काम करेगी।
भुवनेष्वरी मालोत
जिला प्रभारी
पंतजलि महिला योग समिति
बाॅसवाडा राज.
रविवार, 27 अप्रैल 2014
बेटी बचाओ शपथ पत्र भरवाया जाय
आज की सबसे बडी समस्या कहो या विचारणीय पहलू कहो,बेटियो की घटती संख्या, बेटिया का गडबडाता अनुपात,बेटो के लिए बहुओं की कमी है ।आज प्रत्येक को बेटो की सगाई के अवसर पर दोनो पक्षों के लोगों को एकत्रित करके कानूनी से दुल्हा दुल्हन से एक शपथ -पत्र भराया जाय कि विवाह के बाद आने वाली संतान चाहे लडका हो या लडकी उसको स्वीकार करेगे और आपातकालीन परिस्थितियो के अलावा भ्रूण परीक्षण नहीं करवायेगे।शपथ -पत्र के नियम कठोर होने चाहिये साथ ही दोनो पक्ष इसका पूर्ण रूप से पालन करेगें ।सगाई के समय वधु पक्ष को विशष रूप से वर पक्ष के लोगो से बात करनी चाहियंे क्योकि भविषय मे उनकी बेटी ही एक बेटी को जन्म दे सकती हैऔर उसे यह पीडा न सहनी पडे।
बेटी बचाओ आंदोलन के तहत सरकार द्धारा नियुक्त विशषज्ञों .द्धारा सभी बिन्दुओं पर विचार विमश कर श
कन्या -भू्रण हत्या विना चिकित्सको व चिकित्सालय के संभव नहीं है इसमें इनकी बहुत बडी भूमिका होती है इसलिए सख्ती से इन पर रोक लगाई जानी चाहिये और हर रोज होने वाले भू्रण परीक्षण का रिकार्ड रखा जाना चाहिये ।इस तरह से कन्या-भ्रूण हत्या पर रोक लग सकती है।
भुवनेष्वरी मालोत
महादेव काॅलोनी
बाॅसवाडा राज
शुक्रवार, 14 मार्च 2014
शुक्रवार, 31 जनवरी 2014
चक्रासन मेरूदंड के विकारों में लाभकारी
चक्रासन मेरूदंड के विकारों में लाभकारी
पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोडिये और एडिया नितम्बों के समीप लगाकर दोनो हाथो को उल्टा करके कंधो के पीछे रखे और ष्वास अन्दर भरकर कमर और छाती को उपर उठाइये।फिर हाथ व पैरो कोे पास लाने की कोषिष करते हुए षरीर की चक्र जैसी आकृति बनानी है।फिर धीरे धीरे ष्षरीर को ढीला छोडते हुए कमर भूमि पर टिका दें । इस तरह 3से 4 बार करे। यह आसन कमर दर्द,ष्वास संबधी रोग,सिर दर्द,सर्वाइकल व स्पोंडोलाईटिस में लाभकारी है व महिलाओं के गर्भाषय व मेरूदंड के विकारों को दूर करता है ।हमारी आंतो को सक्रिय करके हमारी हाथ पैरो की माॅस पेषियो को मजबूत करता है।
प्रेषकः-
भुवनेष्वरी मालोत
महिला पंतजलि योग समिति
बाॅसवाडा; राज
पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोडिये और एडिया नितम्बों के समीप लगाकर दोनो हाथो को उल्टा करके कंधो के पीछे रखे और ष्वास अन्दर भरकर कमर और छाती को उपर उठाइये।फिर हाथ व पैरो कोे पास लाने की कोषिष करते हुए षरीर की चक्र जैसी आकृति बनानी है।फिर धीरे धीरे ष्षरीर को ढीला छोडते हुए कमर भूमि पर टिका दें । इस तरह 3से 4 बार करे। यह आसन कमर दर्द,ष्वास संबधी रोग,सिर दर्द,सर्वाइकल व स्पोंडोलाईटिस में लाभकारी है व महिलाओं के गर्भाषय व मेरूदंड के विकारों को दूर करता है ।हमारी आंतो को सक्रिय करके हमारी हाथ पैरो की माॅस पेषियो को मजबूत करता है।
प्रेषकः-
भुवनेष्वरी मालोत
महिला पंतजलि योग समिति
बाॅसवाडा; राज
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