बुधवार, 8 मई 2013

                                                                                          




5 05 2013 को वीरा संस्थान द्धारा अस्पताल चैराहे पर राहगीरो को गर्मी से राहत पहुचाने के लिए जल मंदिर का ष्षुभारंभ किया गया ।इसमे संस्थान -प्रभारी  भुवनेष्वरी मालोत, सचिव पुषपा जैन,संगीता ष्षाह उषा पोरवाल  पूनम सोतानी रिद्धी गंगावत ,संगीता गुप्ता,विमला कोठारी, मोहिनी तलरेजा, सरला बेन रेनु वसानिया और मधुलिका आदि का सहयोग रहा ।



                




माॅ-बेटी प्रकल्प  व बेटी बचाओ अभियान के अंतगर्त  अगरपुरा बस्ती में नवप्रसुता व नवजात कन्या को सम्मानित करते हुए 10 बेबी किट ओढने बिछाने के वस्.त्र साडी व पोषण सामग्री में बादाम नारियल गोंद प्रदान किया गया इसमें संस्थान-प्रभारी भुवनेष्वरी मालोत, सचिव पुषपा जैन,संगीता षाह,संगीता गुप्ता,विमला कोठारी, मोहिनी तलरेजा, सरला बेन और मधुलिका आदि उपस्थित थे।






                                                                                                           
बताये बाल-विवाह के नुकसान
वीरा संस्थान ¬¬द्धारा रा प्रा विद्यालय छतरीपाडा में 51 छात्रों को स्टेषनरी ष्षर्ट फाॅक बिस्किट चाकलेट श्रृंगार सामग्री वितरित की ।संस्थान अध्यक्ष भुवनेष्वरी मालोत ने बाल-विवाह के नुकसान बताते हुये, योग हास्यासन कविता कहानी के माध्यम से प्रेरणास्पद जानकारी दी।बेटीयो को सम्मानित किया।सचिव पुष्पा जैन ने बताया कि विद्यालय प्रभारी सलमा बी षेख, मणीलाल मइ्र्रडा, योगेष्वरी जोषी ,देवलता सेठ, उषा पोरवाल ,संगीता गुप्ता मोहिनी तलरेजा सरला जैन  ललिता तिरगर आदि का सहयोग रहा।

          महिला सम्मेलन मे कन्या भ्रूण हत्या न करने का संकल्प लिया

चैत्र नवरात्री पर महिला पंतजलि योग समिति व वीरा संस्थान के सयुक्त तत्वाधन मे महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें सभी बहनों को वीरा संस्थान अध्यक्ष व जिला संयोजिका भुवनेष्वरी मालोत ने हाथ उठाकर सामुहिक स्वर में कन्या भ्रूण हत्या न करने व क्रूरतम व घृणित कार्य का विरोध करने व इस कार्य मे भागीदारी न बनने का संकल्प दिलाया। 



                                              

सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

प्रथम पुण्य तिथि पर हार्दिक श्रृद्धाजंलि









एक साल पहले चली गयी माॅ

लेकिन याद बहुत आती है माॅ

आज भी आर्षीवाद देते हुए ,

हाथों का अहसास दिलाती है माॅ

एक साल पहले चली गयी माॅ,

पर अब तक लगता है,यही कही आसपास है माॅ,

जब मुसीबतों के बादल मडरायें मुझपर,

तेरा आॅचल पार कर आ न सके वो मेरे पास माॅ

एक साल पहले चली गयी माॅ

लेकिन आता नहीं याद कि,

मैं कितनी रोई,किसकी गोद सोई,

आज भी मेरी कोषिष जिसे मुष्किल समझ के छोड देती है,

उसे सुलझाने वहाॅ तक दौंड आती हो आप माॅ

आपकी लाडली बेटी

भुवनेष्वरीै

जिन्दगी एक ख्ुाली किताब है,लेकिन कुछ लोग इसे उल्टी पढ लेते है।वरना इस जिन्दगी की ख्ुाली किताब में साफ लिखा है कि‘‘कुछ समय की मेहनत ‘‘ जिन्दगी भर का सुख है और कुछ समय की मौज मस्ती जिन्दगी भर का दुख है।‘‘



BHUNESHWARI MALOT
MAHADEV COLONY
  BANSWARA(RAJ)
  327001